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करतारपुर के रास्ते को खोलने की बात कर, पाकि झूठी शौहरत इकट्ठी करने की कोशिश में

पिछले 20 वर्षों से भारत करतारपुर रास्ते को सिखों के लिए वीजा के बिना मनजूर करने की अपील करता रहा, क्युंकि करतारपुर सिखों का मक्का है

पिछले 20 वर्षों से भारत करतारपुर रास्ते को सिखों के लिए वीजा के बिना मनजूर करने की अपील करता रहा, क्युंकि करतारपुर सिखों का मक्का है

करतारपुर के रास्ते को सिखों के लिए खोलने की बात कर पाकिस्तान झूठी शौहरत इकट्ठी करने की कोशिश कर रहा है। करतारपुर जो कि सरहद से सिर्फ 4 किलोमीटर की दूरी पर है, पिछले 20 वर्षों से भारत करतारपुर रास्ते को सिखों के लिए वीजा के बिना मनजूर करने की अपील करता रहा, क्युंकि करतारपुर सिखों का मक्का है, जहाँ हर सिख को नतमसतक होने का मानवी अधिकार है। सिख पाकिस्तान में कम गिनती तहत आते हैं, जहाँ सिखों की कोई अलग पहचान नहीं है। पाकिस्तान में हिंदू-सिखों को मरदमशुमारी के तहत भी एक श्रेणी में रखा गया है। कम गिनती को पाकिस्तान में जबरी इस्लाम कबूल करवाया जाता है। अमरीकी राज्य विभाग के अनुसार पाकिस्तान में 20 हजार सिख है, जबकि पाकिस्तान की मरदमशुमारी में 6146 दर्ज किये गये। अगर और बारीकी से देखा जाए तो अफगानिस्तान से सिखों की बड़ी गिनती माईग्रेट हुई। अगर अफगानी सिखों को अमरीकी राज्य विभाग के आँकड़ों से देखा जाए तो पाकिस्तान में सिखों की गिनती 30 हजार के क़रीब बनती है। ऑनलइन समाचारपत्र एशिया समाचार की ओर से एक बड़ा खुलासा किया गया, जिस तहत यह समक्ष आया कि अंतरराशटरी स्तर और सिखों की कामयाबी दिन दुग्गणी रात चौगुनी हो रही है और सिख पाश्चात्य सभयाचार में घुल मिल रहे हैं। जिसके चलते मानसिक रूप से हालातों से जूझ रहे पाकिस्तान में बसे हिंदू इस्लाम कबूल करने का लिए मजबूर हो रहे हैं। सिंध के ग्रामीण इलाकों में हिंदू लड़कियों को जबरी इस्लाम कबूल करवाया जाता है। पाकिस्तान के ह्यूमन राईटस कमीशन के अनुसार धार्मिक कम गिनती आसान टारगैट्ट है, जिन को जलद अपना शिकंजे में ग्रसा जा सकता है।
पाकिस्तान के कई ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदू और सिख महिलाओं की जबरी मुसलमानों से शादी की जाती है, जिस से वह इस्लाम कबूल कर लें. गैर मुसलिम लोगों को इसलामक गतिविधिओं के ख़िलाफ़ बोलने का अधिकार नहीं। 7 दशक पहले पाकिस्तान हिंदू और सिखों का घर होता था, किन्तु अब बहुत से हिंदू वहां बरबाद हो कर आवासहीन हो चुके हैं। हिंदू और सिख भाईचारा भू माफिया का शिकार हुआ है। जिसके चलते हुए बहुत हिंदू और सिख धार्मिक स्थान, पुरानी इमारतें, हवेलियाँ इत्यादि जबरी तोड़े गये। फरवरी में ईसाई धर्म से सम्बन्धित शादीशुदा 35 वर्षीय साईमा इकबाल को मुसलिम खालिद सत्ती ने अगवाह किया, जो काल सेंटर से अपनी रात की ड्यूटी कर घर जा रही थी. हैरानीजनक है कि पुलिस की ओर से ऐफ आई आर दरज नहीं की गई. आख़िरकार साईमा के पति इकबाल की ओर से आतमदाह की धमकी देने के उपरांत साईमा को 5 मार्च की शाम को अगवाहकार्यं से छुडवाया गया। दोनों पति-पत्नी की ओर से वीडीओ संदेश के द्वारा पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान को इंसाफ के लिए दखलअंदाजी की अपील की गई.
इकबाल की ओर से समूह इसलामक भाईचारे को सवाल किया गया कि अगर उसकी पत्नी के स्थान पर विदेशों में बसे किसी और ईसाई की पत्नी होती तो वह क्या करते? ऐसे हालातों में रहने से बेहतर है कि कम गिनती इस जहान को अलविदा कह जाएँ. उस ने समूह ईसाई भाईचारे से मदद की गुहार लगाई। 15 वर्षों से अपनी ब्याहता को जीसस के नाम पर छुड़वाने की अपील भी की। शिराज खान की ओर से इमरान खान सरकार के इस मुद्दे को ले कर बड़े स्तर पर निंदा की गई. इमरान खान की ओर से चुनाव के दौरान कम गिनती की मदद और इंसाफ दिलाने के वाअदे साईमा इकबाल के अगवाह होने से पश्चात झूठे नजर आये। इमरान खान ने नये पाकिस्तान की बात की थी और शिराज खान के अनुसार आज भी जनरल जया उल हक्क वाला वही पाकिस्तान है, जो सिर्फ अपने हुकुमों की तालीम करता था। करतारपुर र्कोरीडोर प्राजेकट को पूरा करने के लिए सथानक गाओं वासियों से जबरी जमीन कुआयर की गई, यहाँ तक कि खोटे खुर्द की जमीन गंन पुआयंट पर लोगों से छीनी गई और 600 गाओं वासियों को तुरंत घर खाली कर जाने के आदेश जारी किये गये।
खोटे खुर्द वासी हाजी अर्शद ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि प्रशासन की ओर से सिर्फ घर और जमीन छोड़ कर जाने के आदेश जारी किये गये।
तैयार फसल और भरे पूरे घर को छोड़ कर जाने के बदले मुआवजा देने की कोई बात नहीं की गई. उन्होंने कहा कि, अपने पूर्वजों की धरती को छोड़ कर जाना अत्यंत दुखदायक था। एक और किसान मुहम्मद अफजल ने कहा कि, हम प्रशासन को बहुत कहा कि अपने पूर्वजों की धरती को छोड़ कर जाने को न कहा जाए. ढोडा पिंड के खालिद अहिमद सिख धार्मिक स्थान के लिए जमीन देने के लिए अपने आप को खुशकिसमत समझते हैं, किन्तु उनका मानना है कि हमारी जमीन जबरी न छीनी जाए. जिस तरह भारत बगल वाले ग्रामीण हलक़ों की जमीन राहदारी के लिए भारत सरकार की ओर से 50-70 लाख में ख्रीदी गयी है, उस तरह हमें भी सरकारी मुआवजा लाज़िम मिलना चाहिए.

पाकिसतानी सिखों को इस्लाम स्वीकारने के लिए क्यों कहा गया?

पंजाब एक्सप्रेस और हरबिंदर सिंह धालीवाल का विशेष धन्यवाद – मोनू बराना