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पाकिस्तान पर FATF से ब्लैकलिस्ट होने का खतरा

आतंकवाद को भारत और अफगानिस्तान जैसे देशों के खिलाफ स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करते आ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही बेहद खस्ताहाल है। ऊपर से उस पर फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। FATF की तरफ से ब्लैकलिस्ट किए जाने से बचने के लिए इस्लामाबाद अब पेइचिंग की शरण में है। इसके अलावा, वह मलयेशिया और तुर्की से भी मदद की आस लगाए हुए है। FATF अक्टूबर में पाकिस्तान की समीक्षा करेगा। उसने इस्लामाबाद को आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए 27 कदम उठाने को कहा था लेकिन पाकिस्तान ने प्रस्तावित कदमों में से आधे भी नहीं उठाए हैं और जो उठाए हैं, वे भी दिखावे के लिए। हैरत की बात तो यह है कि FATF से इतर पिछले कई दिनों से वह कश्मीर में भारत सरकार के फैसले से बौखलाया हुआ है।  पड़ोसी देश की वित्तीय हालत काफी खस्ताहाल है। आलम यह है कि उसके खजाने में विदेशी पूंजी भंडार बस इतना बचा है कि महज दो महीनों के आयात के काम आ सकता है। इससे वहां भुगतान संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। संभावना है कि इस समीक्षा में पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया जाएगा। इसके बाद वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पाकिस्तान की पहुंच कम हो जाएगी और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा उसे दिए जा रहे 6 अरब डॉलर के कार्यक्रम पर भी असर पड़ेगा। 
अमेरिकी और यूरोपीय देशों द्वारा आंतकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और आतंकवाद को सहारा देने वाले देशों पर लगाम लगाई जा रही है। इसके तहत पाकिस्तान को भी 27 कदम उठाने की सूची दी गई है, जिसमें आतंकवाद के वित्त पोषण की पहचान कर उसे रोकने और अवैध मुद्रा पर काबू पाने को कहा गया है। अगर पाकिस्तान इसे पूरा करने में नाकाम रहता है तो उसे ईरान और उत्तर कोरिया की तरह ही ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती हुई यह दीवार कुछ समय के लिए दोनों देशों के रिश्तों को अभिभूत करेगी, विशिष्ट रूप से उस समय जब पाकिस्तान आर्थिक संकट में उलझा हुआ है। पाकिस्तान का कोई भी अगला कदम उसकी अर्थ व्यसथा को हिला कर रख सकता है। पाकिसतानी फौज भी ऐसा कोई जौखम लेने के हक्क में नहीं है। सरकार की भी ओर से खामौशी का माहौल है। प्रतिद्वंदी धिर की ओर से किये जा रहे सवालों का जुआब आई ऐस आई के सहयोगी इंटर सर्विस पबलिक रिलेशन की ओर से दिये जा रहे हैं। चर्चा है कि पाकिसतानी आरमी का चीफ जनरल बाजवा, मुशर्रफ के नक्शों कदमों पर चल रहा है, जो कि भारत से कश्मीर को अलग करने के सपने दिखा देश को अपने कब्जे में करने की तैयारी कर चुका है।

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