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पढ़ने का नशा लगाने शुरू किया ठेका किताब

नशा ज्ञानवर्धन के साथ-साथ सेहत के लिए अच्छा है। यहां से पढ़ने के लिए किताब घर ले जा सकते हैं, शर्त ये है कि ईमानदारी से वापस करनी होगी

नशा ज्ञानवर्धन के साथ-साथ सेहत के लिए अच्छा है। यहां से पढ़ने के लिए किताब घर ले जा सकते हैं, शर्त ये है कि ईमानदारी से वापस करनी होगी

खन्ना-मालेरकोटला रोड पर गांव जरगड़ी में एक टीचर दर्शनदीप सिंह गिल ने किताबों का ठेका खोला है। नाम दिया है ‘ठेका किताब देसी ते अंग्रेजी’। लोगों में पढ़ने का नशा बढ़ाने के लिए ठेका किताब की शुरुआत की गई। दर्शनदीप का मानना है कि लोगों को नशा करना है तो किताबों का करना चाहिए। ये नशा ज्ञानवर्धन के साथ-साथ सेहत के लिए अच्छा है। यहां से पढ़ने के लिए किताब घर ले जा सकते हैं, शर्त ये है कि ईमानदारी से वापस करनी होगी। खन्ना-मालेरकोटला रोड के गांव जरगड़ी के फार्म हाउस के बीच बनी इस लाइब्रेरी का नाम पढ़कर यहां से गुजरने वाला राहगीर जरूर रुकता है। मतलब पूछता है। फिर लाइब्रेरी का जायजा लेकर जाता है। 

सरकारी स्कूल में टीचर दर्शनदीप को ऐसी अनोखी लाइब्रेरी खोलने के लिए उनकी पत्नी रविंदर कौर ने प्रेरित किया। जो गांव के ही प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं। पूरे परिवार में सबको किताबें पढ़ने का शौक है। सालभर में जमा पुरानी किताबें रखने के लिए लाइब्रेरी बनाई हैं। ठेका किताब देसी ते अंग्रेजी शुरू करने का सुझाव पति को रविंदर कौर ने ही दिया था। लाइब्रेरी में देसी मतलब पंजाबी के साथ ही अंग्रेजी भाषाओं वाली किताबें रैक में सजी हैं। इनमें तर्कशीलता के साथ सीख देने वाली कहानी की किताबें शामिल हैं। लाइब्रेरी की दीवार पर पंजाबी के वो शब्द लिखे हुए हैं, जो कभी रोजमर्रा इस्तेमाल होते थे। गिल दंपति स्कूली बच्चे बुला इन शब्दों का मतलब बताने के मुकाबले भी कराते हैं।

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